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आरती

श्री जगदीश जी की आरती

Shri Jagadish Ji Ki Aarti

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श्री जगदीश जी की आरती
संक्षेप में

ॐ जय जगदीश हरे भगवान विष्णु को समर्पित अत्यंत लोकप्रिय हिंदी आरती है, जिसमें जगदीश को जगत का स्वामी, करुणा का सागर और पालनकर्ता मानकर उनकी शरण माँगी गई है। इसकी रचना पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी द्वारा मानी जाती है। इसे पूजा के अंत में, सत्यनारायण कथा में तथा सुबह और शाम की आरती में दीपक घुमाते हुए गाया जाता है।

मुख्य बातें

  • ॐ जय जगदीश हरे आरती भगवान विष्णु को समर्पित है।
  • जगदीश का अर्थ है जगत के ईश, अर्थात संपूर्ण संसार के स्वामी।
  • इसकी रचना पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी द्वारा मानी जाती है।
  • सत्यनारायण पूजा और घर की दैनिक आरती में इसे विशेष रूप से गाया जाता है।
  • इस पाठ की अंतिम पंक्ति में शिवानन्द स्वामी का नाम आता है।

॥ आरती श्री जगदीशजी ॥

ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी ! जय जगदीश हरे।

भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥

॥ ॐ जय जगदीश हरे॥

जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का।

सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥

॥ ॐ जय जगदीश हरे॥

मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूँ मैं किसकी।

तुम बिन और न दूजा, आस करूँ जिसकी॥

॥ ॐ जय जगदीश हरे॥

तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी।

पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥

॥ ॐ जय जगदीश हरे॥

तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता।

मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥

॥ ॐ जय जगदीश हरे॥

तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति।

किस विधि मिलूँ दयामय, तुमको मैं कुमति॥

॥ ॐ जय जगदीश हरे॥

दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे।

अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥

॥ ॐ जय जगदीश हरे॥

विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा।

श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥

॥ ॐ जय जगदीश हरे॥

श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे।

कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥

॥ ॐ जय जगदीश हरे॥

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ॐ जय जगदीश हरे आरती किस भगवान की है?
यह आरती भगवान विष्णु को समर्पित है। जगदीश का अर्थ है जगत के ईश या स्वामी, जो श्री हरि का ही एक नाम है। सत्यनारायण भगवान की पूजा में भी यही आरती गाई जाती है, क्योंकि उन्हें भगवान विष्णु का ही स्वरूप माना जाता है।
ॐ जय जगदीश हरे का अर्थ क्या है?
इसका अर्थ है: हे जगत के स्वामी श्री हरि, आपकी जय हो। आप अपने भक्तों के संकट क्षण भर में दूर कर देते हैं। हरि भगवान विष्णु का नाम है, जिन्हें संकट और पाप हरने वाला माना जाता है।
ॐ जय जगदीश हरे आरती की रचना किसने की?
इस आरती की रचना पंजाब के फिल्लौर नगर के विद्वान पंडित श्रद्धाराम फिल्लौरी ने उन्नीसवीं सदी में की मानी जाती है। यहाँ दिए गए प्रचलित पाठ की अंतिम पंक्ति में शिवानन्द स्वामी का नाम आता है, जो इस आरती का एक प्रसिद्ध रूप है।
जगदीश जी की आरती कब और कैसे करें?
पूजा पूरी होने के बाद थाली में घी या कपूर का दीपक जलाकर भगवान के सामने गोलाकार घुमाते हुए यह आरती गाई जाती है। घर की सुबह और शाम की पूजा, सत्यनारायण कथा और अन्य शुभ अवसरों पर परिवार के साथ मिलकर इसे गाना शुभ माना जाता है।
ॐ जय जगदीश हरे आरती गाने के क्या लाभ हैं?
आरती की पंक्तियों के अनुसार जो भक्त श्रद्धा से भगवान का ध्यान करता है, उसके मन के दुःख मिटते हैं, घर में सुख संपत्ति आती है और तन के कष्ट दूर होते हैं। अंतिम पंक्ति भी कहती है कि इसे गाने वाला सुख संपत्ति पाता है।
आरती की पंक्ति मैं मूरख खल कामी का क्या भाव है?
इस पंक्ति में भक्त विनम्रता से स्वीकार करता है कि वह अज्ञानी, दोषों से भरा और कामनाओं में उलझा हुआ है। वह भगवान को अपना भर्ता यानी पालन करने वाला मानकर उनसे कृपा की प्रार्थना करता है। यह अहंकार छोड़कर पूर्ण शरणागति का भाव है।
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